Tuesday, October 19, 2021
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हिन्दू संस्कृति का प्रतीक ‘नमस्कार’ हमें अपनी पुरातन संस्कृति को बनाये रखना चाहिए : आचार्य उमा शंकर दीक्षित

आनी(मधु शर्मा):भले ही कोरोना काल मे हमे गले से मिलकर अपने स्नेह का भाव प्रकट नही कर पा रहे हो परन्तु हमारी प्राचीन संस्कृति में नमस्कार का एक अलग महत्व है। नमस्कार के महत्व को शास्त्रों के ज्ञाता रिवाड़ी निवासी उमा शंकर दीक्षित ने कुछ इस तरह से समझाया। ईश्वर के दर्शन करते समय अथवा ज्येष्ठ या सम्माननीय व्यक्ति से मिलने पर हमारे हाथ अनायास ही जुड जाते हैं । हिन्दू संस्कृति में अंकित एक सात्त्विक संस्कार है ‘नमस्कार’ । नमस्कार करना भक्तिभाव, प्रेम, आदर, लीनता जैसे दैवीगुणोंको व्यक्त करनेवाली व ईश्वरीय शक्ति प्रदान करनेवाली यह एक सहज धार्मिक कृति है । आचार्य दीक्षित ने नमस्कार की योग्य पद्धतियां के बारे में समझाया की, नमस्कार करते समय क्या नहीं करना चाहिए, और नमस्कार कैसे करना चाहिए। इसके लाभ के बारे में विस्तार से समझाया है। नमस्कार के कुछ लाभ इस प्रकार है मूल धातु ‘नम:’से ‘नमस्कार’ शब्द बना है । ‘नम:’ का अर्थ है नमस्कार करना, वंदन करना ।‘नमस्कार का मुख्य उद्देश्य है – जिन्हें हम नमन करते हैं, उनसे हमें आध्यात्मिक व व्यावहारिक लाभ हो । व्यावहारिक लाभ
देवता अथवा संतों को नमन करने से उनके गुण व कर्तृत्व का आदर्श हमारे समक्ष सहज उभर आता है । उसका अनुसरण करते हुए हमें स्वयं को सुधारने का प्रयास करना चाहिए । नमस्कार के आध्यात्मिक लाभ भी मिलते है जैसे नम्रता बढती है व अहं कम होता है । शरणागिति व कृतज्ञताका भाव बढता और सात्त्विकता मिलती है व आध्यात्मिक उन्नति शीघ्र होती है
अक्सर हम सब मंदिरों में माथा टेका करते है, इसके पीछे भी हमारे कई कारण है। मंदिर में प्रवेश करते समय सीढियों को नमस्कार किया जाता है । जब भी हम सीढियों को दाहिने हाथ की उंगलियों से स्पर्श कर, उसी हाथ को सिर पर फेरें । ‘मंदिर के प्रांगण में देवताओं की तरंगों के संचार के कारण सात्त्विकता अधिक होती है । परिसर में फैले चैतन्य से सीढियां भी प्रभावित होती हैं । इसलिए सीढी को दाहिने हाथ की उंगलियों से स्पर्श कर, उसी हाथ को सिर पर फेरने की प्रथा है । इससे ध्यानमें आता है कि, सीढियों की धूल भी चैतन्यमय होती है; हमें उसका भी सम्मान करना चाहिए। हमे अपनी दैनिक दिनचर्या में नमस्कार को लाना होगा और कोशिश करें हम फलकारक नमस्कार करें ताकि जीवन की बाधाओं से दूर हो सके।

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